Description
निष्कर्षतः कहा जाना चाहिए कि संजय बोरूडे का यह कविता संग्रह ‘पर्णसूक्त’ न केवल अपने शीर्षक की समीचीनता साबित करता है वस् पाठकों के मन को उद्वेलित भी करता है। हिन्दी कविता के संसार में इस अनोखे और संभावना से भरे कवि का मैं हृदय से स्वागत कर रहा हूँ और आशा करता हूँ कि यह संग्रह बहुत बढ़ा और सराहा जाएगा।
डॉ. विमलेश त्रिपाठी,
कोलकाता
06.12.2024

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